संसार में दान की बड़ी चर्चा है और कई लोगो के लिए यह दान लोगो से पैसे वसूलने का एक हथकंडा भी है और इसी के ज़रिये वो लोगो की कड़ी कमाई लूट कर अपने आश्रम और अपने लिए ऐश का जीवन जी रहे है। पर क्या यह दान है क्या इस दान का कोई लाभ किसी को मिल रहा है ,और यह दान किस काम का जो केवल मूर्ती के अग्गे रख दिया जाये और फिर एक बैंक में बी हर दिया जाये और लाखो की हेराफेरी उसमे होती हो यही ऐसी बात है जिसकी वजह से मुर्ख लोगो को समज में नहीं अत है की ऐसे दान से तो किसी गरीब को कुश दे दिया जाये। असल में गलत लोगो के प्रचार के कारन ह ई इन लोगो ने जनता को लोभी बना रखा है जिसकी वजह से ए दिन नए नए कारनामे हमे दिखाई दे रहे है और लोग लोभ वष होकर अगले जनम में १० गुना धन की आस लगाये यहाँ पर करोडो का पैसा मूर्तियों और ऐसे कामो में बर्बाद कर देते है जिनका कोई अर्थ भी नहीं होता है ,देश में सबसे ज्यादा पैसा धार्मिक कामो पर खरच किया जाता है और यही एक ऐसा काम है जिससे बड़ी बर्बादी होती है एक तरफ पी के जैसे फिल्म्स में धर्मो के पाखंड को दिखाया जाता है और दूसरी तरफ इस पर बहस होती है की यह किसी के धरम के ऊपर आस्था के ऊपर हमला है , से देखा जाये धर्मो में जो पाखंड है वो सबको पता है की क्या क्या है पर बस अब लोगो की आदत हो चली है की उन कामो को आँख मूँद कर उसकी पलना करते चले अ रहे है और असली बात क्या है यह हम सब भूल जाते है। पर इसका कसूर बार कौन है ,बेशक हम लोग ही है अगर हम ल ओग पैसा देना ही बंद और यह पैसा अगर देना भी है तो कही ऐसी जगह दे जैसे किसी गरीब बेटी की शादी करवा दी और किसी को खाना खिला दिया अगर हमारे पास कुश ज्यादा है तो क्यों न उन लोगो से इसको बाटा जाये जिनको इसकी जरुरत है न की किसी जड़ वास्तु के अग्गे अर्पण कर दिया जाते अगर देश के सभी लोग इस पाखंड वाद के ऊपर शिकंजा कस ले तो यह सम्भव ही नहीं है की किसी पाखंडी की दाल यहाँ गाल जाये और यह केवल ज्ञान के द्वारा ही सम्भव है। ऐसा दान ही सच दान है क्यों दान शब्द भी असल में ठीक नहीं है क्योकि दान तो अपने से छोटे को दिया जाता है पर जब सब इंसान ही बराबर है तो छोटा बड़ा कौन है ,और यह बात भी है की विद्या दान किसी को अज्ञानता के अँधेरे से बाहर निकल देना ही एक सच दान है। बाकि कोई चीज हम दान कर भी नहीं सकते है क यो सभी चीजे तो परमेश्वर ने हमे दान में दी हुए है और हम तो सिर्फ उसकी ही दी हुए चीजे देकर आदान प्रदान कर सकते है। देश में भड़ती गरीबी का कारन यह भी एक है की मंदिरो में दान देना जिसपर टैक्स बहुत काम होता है और कभी कभी तो नहीं होता है ऐसे स्थानो पर दिया हुआ पैसा वहाँ पर ही रह जाता है और उसका कही आदान प्रदान नहीं होता है जिसके की वजह से पैसा रुक जाता है और देश में गरीबी को पैदा करने में मदद करता है। हम सबको ही इस बात का प्रन लेना चाइए की अज्ज से हम ऐसा ही दान करेंगे और अगर ऐसा दान लग जाये तो इस देहस और दुनिया की तस्वीर ही बदल जाये
Chủ Nhật, 25 tháng 1, 2015
मन की तृप्ति
मन की तृप्ति और शांति के लिए पता नहीं हूँ क्या क्या करते है पर हमे कभी नहीं यहाँ पर तृप्ति प्रपात नहीं होती है इसका कारन क्या है हमे पता नहीं है सुख के पीछे भागते हुए पता नहीं कितने जनम हो गए है पर सुख का एक लेश मात्र भी नहीं एक मनुष्य के हाथ में आया है। बस हम यहाँ पर पदार्थ वाद क ई दौड़ में इतना उलज कर रह गए है की जितना लोभ के पीछे भगा उतना ही दिल का चैन खो गया है। गुरु नानक ने यही कहा है की भूख्या भूख न उतरे जे बना पुरिअ भार के चाहे तुम पूरी दुनिया की दौलत इकठी क्यों न कर लो तब भी दुःख ने हमारा पीछा नहीं छोड़ देना है। असल में जिस सुख को हम बहार की दुनिया में खोज रहे है वो असल में कही पर बहार नहीं बल्कि हमारे ही भीतर हमारा शुद्ध चेतन पूर्ण टूर से सुख सरूप है और कभी दुःख उसमे होता ही नहीं है बल्कि दुःख हमारे ही अंदर की सोच से जनम लेता है चाहे मनुष्य कितना भी दुसरे को धोखा देकर सोचता रहे की यहाँ पर धन इकठा करके में सुख हासिल कर लूंगा पर असल में सचयी इससे उलट होती है ,जब जब धन का अम्बर लगता है इसका जीवन उतना ही नरक में चला जाता है ,,असल में हम यह नहीं कह रहे है की धन वास्तु है जिससे आपको नुक्सान हो सकता है जा फिर यह कोई ऐसी वास्तु है जिससे कोई लाभ ही नहीं है पर धन की सोच में धोखा करना और लालच वास होकर गैर कानूनी काम कर देना यह एक बहुत बड़ा अप्राद है ,भारत एक गरीब देश है यह सिर्फ एक भरम है सच तो यह है की हमारा देश असल में गरीब बना दिया है कुश चाँद भरष्ट लोगो ने वार्ना अज्ज भी देश एक अमीर देश में शुमार होता है। कैसे हमारी जिनगी सही तरीके से चल पड़े और हम यहाँ पर सभी सुखी हो यह तब ही सम्भव है जब हम उस परमेश्वर की कृपा का एहसास करे और लोभ त्याग कर सिर्फ और सिर्फ अपने काम की और धयान दे यही एक सुखी जिनगी जीने का तरीका है। ईमानदारी यहाँ होती है वही पर सारी चीजे जाती है। क्योकि यहाँ यह चीज है वह पर क ओइ किसी का हक्क नहीं मारता है और सव लोग आपस में एक दुसरे का सहयोग करते है और जिससे गरीबी और अमीरी का फरक मिटता जाता है और देश के रूप में विकसशली बनते जाते है और तभी एक शक्तिशाली देश के रूप में हम उभर उभर सकते है। शक्ति सिर्फ धन ही की नहीं होती है बल्कि चरितर और धरम की भी होती है इसी लिए अज्ज भारत को अपने धरम की और होगा जिससे एक बार यह फिर से विषब गुरु की उपादि पर आ जाये
Chủ Nhật, 18 tháng 1, 2015
what is love
what is love always we think that what is love ,all people know it that its time to be k ind and kind of the main time ,i think llove is j ust a kind of felling that is give us happiness and enjoyment and we think that is love
Thứ Bảy, 17 tháng 1, 2015
Is the black magic true
Is the black magic true,many people wan ts to know this truth that black magic is work or not but the truth is that black magic is not the real black magic ,it is just a fraud with the people and they just try to grab the some kind of money from the innocent people who have faith in it and think that this can help them in a good way ,But all this kind of things have the mental effect on someones health,they are just thug people who just try to steal money from you,we know that life is the full of pain and sorrow and it is the part of our life so why we are thinking that if some kind of things help us in this kind of situation ,,,i just know one thing that all things in the gods hands and we should leave everything on the the supreme lord the god parmeshvar waheguru ,,,,so if anytime or anywhere someone ask you about black magic you should give them this answer
जनम और मरण
जब से मनुष्य पैदा हुआ है तबसे इसी खोज में जुटा हुआ दुनिया में हम क्यों पैदा हुए है और इस दुनिया से अग्गे इसने कहा पर जाना है पर अगर हूँ कुश धार्मिक ग्रंथो की और देखे तो हमे मालूम की दुनिया में हम यहाँ किसके लिए पैदा हुए है और क्या करने ए है और क्या हमारा लक्ष है और क्यों हम यहाँ पर कर रहे है जे जीव क्या है कहा से आता है और कहा चला जाता है जे सब सवाल भी हमारे दिमाग में बार घूम रहते है इसी लिए तो परमात्मा अपना ज्ञान हमे देता रहता है असल में जनम और मरण भी इसी कड़ी का ही एक हिस्सा मात्र ही है क्योकि जनम और मरण हमे यहाँ पर ज्ञान देने के लिए ही तो मिला है ,जबतक जनम और मरण रहता है तबतक हम ज्ञान की और से उनत होते रहते है और यही इसका मकसद है की हम ज्ञान के रूप से अपने अप्प क ओ उन्नत कर पाये और हमेशा ककए लिए अपनी उसी अवस्था में पुहंच जाये जिस पर हम ए है। यही इस इंसान का एक लखस है पर जब तक हम इस ज्ञान की प राप्ती नहीं कर लेते है तब तक हमे शरीर मिलता ही रहता है और यह कोई प्रकोप नह बल्कि उस बहुत बड़ी कृपा है हम पर की हम सब यहाँ पर नया ज्ञान हासिल करते जा रहे है इसी ही तो विकास सम्भव है इस दुनिया भी कोई भी ज्ञान है जेह ज्ञान अतर आत्मा का ही एक प्रतीक है सारा का सारा ज्ञान ही अंतर आत्मा से अ रहा है और यही को ज्ञान मगर हम अगर ज्ञान को अग्गे बढ़ाने की करते रहेंगे तो यह ज्ञान भी पहंच सकता है। का हिस्स्सा है जब तक को जान इसको रहने आसरा चाहिय ही और इसको यह असर यहाँ पर सरीर से ही मिलता है सरीर अब मन का घर है मगर जब यह अपने निज सरूप को जान लेता है तो इसका भरम दूर हो जाता है और हीर इसको कोई दूसरा सरीर धारण करने की कोशिश नहीं रहती है यही ज्ञान सरूप आत्मा है
Thứ Sáu, 16 tháng 1, 2015
धर्म और धंधा
यही आज के ज़माने की सचाई है की धर्म एक धंधा बन गया है सब के लिए जबकि धर्म के पैसे से कोई भी सम्बन्ध नहीं है। पैसा तो दुनिया में फसाने वाली चीज है जो ज्ञान मार्ग और मुक्ति मार्ग में रूकावट है। पर यह भी नहीं है की पैसा होना रूकावट है असल में पैसे में मन का हुआ होना ही सबसे बड़ी रूकावट है। यही सबसे बड़ी भूल है। पर आज चारो तरफ अगर नजर मर कर हम देखते है तो बहुत सरे बाबा लोग धर्म की परिभाषा हमारे सामने गलत पेश कर रहे है जो की सारा सर झूठ बात है पर असल में सबका एक ही लक्ष है धन माया क्योकि धर्म की शिक्षा ही माया के ऊपर टिकी हुए है क्योकि वो सब लोग जो बाबा बने हुए है सबकी एक ही मंशा है की किसी तरह दुनिया को लूट कर पैसा इकठा कर लिया जाये जो की सारा सर गलत बात है पर अगर हम देखते भी है की क उष बाबा लोग ठीक भी हो सकते है पर सभी के बारे में हम ऐसा नहीं कह सकते है क्योकि कुश लोग दुनिया में ज्ञान का प्रचार प्रसार कर रहे है पर ऐसे लोग बहुत काम ही है नहीं तो वो दुनिया के सामने है और न ही दुनिया में उनकी कोई भी बात है यही यहाँ की सचाई है की सच का सामना करना हर किसी के बस की बात नहीं है और जब लोगो के सामने ऐसे पाखंडी बाबा लोगो की सचाई सामने अति है तो लोगो की शारदा टूट जाती है और यही बात कभी कभी दंगो का रूप भी ले लेती है। पर असल में यदि ह उम देखगे की यही देहस और दुनिया में रहा है धर्म और जाती के नाम पर लोगो को लड्डा कर लूटा जा रहा है। इस सभी का एक ही हल है की लोग खुद ज्ञान और अज्ञान में से फैसला करना सीख ले की क्या हम जिस मार्ग पर चल रहे है उसमे हमारे सामने कोई ऐसा संत तो नहीं जिसको लोभ वष होकर पैसा लालच है और वही हम सबको एक कुए की और धकेल रहा है जिसमे न सिर्फ पड़ी लिखी श्रेणी है बल्कि अनपढ़ तबका ज्यादा है और ऐसा संत का अंत चुके है की क्या होता है। रामपाल और आसाराम जैसे लोगो का अंत हमारे सामने ही है उसकी क्या दशा हुए है। अब इस देश को जागने के टाइम है अगर यह देश इस पाखंड की नींद से न जागा तो न जाने इस देश हाल होगा
परमेश्वर और साइंस
परमेश्वर और साइंस एक बहुत ही अलग अलग विष रहा है लोग सोचते है ,,,पर यह बात ऐसा नहीं है धर्म और साइंस अलग अलग नहीं है पर असल में परमेश्वर ने ही अपने हुकम से सृष्टि की रचना की है और यह रचना भी एक पर्कार के ज्ञान से हुई है। और यही ज्ञान अज्ज हम इसकी खोज कर रहे है। और यही खोज को आज साइंस कहते है पर हम यह नहीं जानते है की इस विज्ञान को सबसे पहले पैदा किसने किया है और उसको वो रूल्स किसने प्रदान किये है। नास्तिक लोग हमेशा पर्किर्ति को ही सबसे बड़ी शक्ति मानते है ,पर और वो यह नहीं जानते है की पर्किर्ति को यह शक्ति कौन प्रदान करता है ,पर्किर्ति को यह शक्ति परमेश्वर ही प्रदान करता है क्योकि सब उससे ही तो पैदा हुआ है। जब कुश विज्ञान की खोज करने वाले यह नहीं मानते है की हम तो सिर्फ परमेश्वर की बनायीं हुए सृस्टि निजामों की खोज ही कर रहे है पर यह नहीं जानते को ग्रेविटी और सूरज में तेज यह किस पर्कार होता है। धरती की दूरी भी बहुत सटीक है पूरी पूरी न बहुत ज्यादा न बहुत कम होती है और यह करने के लिए हमेशा ही ऐसी चेतना जरुरत पड़ती है और ऐसी चेतना किसी दिमाग वाले की हो सकती है और यह एक बहुत बड़ी चेतना का ही कमल है ,,,उसी कोई सृष्टि का करता कहा जाता है। और यही करता परमेश्वर उसको कहा जाता है उसी से सृष्टि उत्पन होती है और उसी में सृष्टि ले हो जाती है इसी लिए अरमेश्वर को जानना और मन्ना से फरक पड़ता है क्योकि परमेश्वर को जानने का साधन है बस एक मात्र है जो सिर्फ ज्ञान है और कुश भी नहीं है जब दुनिया के सभी काम हम ज्ञान के माध्यम से ही सम्पूर्ण कर ते है तो परमेश्वर को जानने का कार्य भी बिना ज्ञान से होना कैसे सम्भव है यही धर्म का सार है
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